
Dark Reality of Society
Vijay Kumar
यह किताब "Dark Reality of Society" (समाज की कड़वी सच्चाई) समाज में गहराई तक बैठे उन मिथकों, भ्रमों और रूढ़िवादी विचारों को उजागर करती है, जिन्हें हम अक्सर बिना सोचे-समझे सच मान लेते हैं। यह हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि क्या वास्तव में हम एक आज़ाद...
Location:
United States
Description:
यह किताब "Dark Reality of Society" (समाज की कड़वी सच्चाई) समाज में गहराई तक बैठे उन मिथकों, भ्रमों और रूढ़िवादी विचारों को उजागर करती है, जिन्हें हम अक्सर बिना सोचे-समझे सच मान लेते हैं। यह हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि क्या वास्तव में हम एक आज़ाद सोच के साथ जी रहे हैं या केवल समाज द्वारा तय किए गए रास्तों पर चल रहे हैं। Duration - 3h. Author - Vijay Kumar. Narrator - Monika Sogam. Published Date - Thursday, 16 January 2025. Copyright - © 2025 Vijay Kumar ©.
Language:
Hindi
Opening Credits
Duration:00:00:38
लेखक के बारे में
Duration:00:00:56
इस किताब के मुख्य उद्देश्य और यह क्या बताना चाहती है
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भाग - 1: शिक्षा, करियर और सफलता के भ्रम
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अध्याय 1: सरकारी नौकरी = लाइफ सेट?
Duration:00:03:22
अध्याय 2: Marks ही Success तय करते हैं?
Duration:00:03:25
अध्याय 3: टॉप कॉलेज = टॉप लाइफ?
Duration:00:03:44
अध्याय 4: Degree = Knowledge?
Duration:00:03:04
अध्याय 5: नौकरी ही सब कुछ है?
Duration:00:03:16
अध्याय 6: पढ़ाई पूरी, अब सीखना बंद?
Duration:00:02:53
अध्याय 7: डिग्री > स्किल?
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अध्याय 8: कोचिंग = सफलता की गारंटी?
Duration:00:02:16
अध्याय 9: MBA / Engineering = Success का एकमात्र रास्ता?
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अध्याय 10: Success = दूसरों से आगे निकलना?
Duration:00:02:16
भाग - 2 : व्यक्तित्व, पहचान और सामाजिक दबाव
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अध्याय 11 : “अंग्रेज़ी बोलना = स्मार्ट बनना?
Duration:00:03:16
अध्याय 12: IQ ज़्यादा = सक्सेस तय?
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अध्याय 13: फेलियर = लूज़र?
Duration:00:02:57
अध्याय 14: टैलेंट भगवान देता है?
Duration:00:03:22
अध्याय 15: इंट्रोवर्ट्स कमजोर होते हैं?
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अध्याय 16: टॉपर = ज़िंदगी भर टॉप पर?
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अध्याय 17: “लोग क्या कहेंगे?” — समाज का सबसे बड़ा ड्रामा
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अध्याय 18: बिज़ी होना = प्रोडक्टिव होना?
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अध्याय 19: सेल्फ-लव = सेल्फिशनेस?
Duration:00:02:30
अध्याय 20: Looks = Confidence?
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अध्याय 21: Creativity = फालतू चीज़?
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अध्याय 22: Branded चीज़ें = Status Symbol?
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अध्याय 23: खुश रहना = हर वक्त हंसना?
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अध्याय 24: Reputation > Reality?
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भाग - 3 : रिश्ते, लिंगभेद और पारिवारिक रूढ़ियाँ
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अध्याय 25: लड़के रोते नहीं?
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अध्याय 26: लड़कियों को ज़्यादा आज़ादी देना ग़लत है?
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अध्याय 27: शादी = सब कुछ ठीक हो जाएगा?
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अध्याय 28: इज़्ज़त औरत की बॉडी से जुड़ी है?
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अध्याय 29: जेंडर के साथ रोल भी फिक्स हैं?
Duration:00:02:17
अध्याय 30: घर संभालना = सिर्फ औरत की जिम्मेदारी?
Duration:00:02:31
अध्याय 31: औरत अगर बाहर काम करे तो घर बर्बाद हो जाता है?
Duration:00:02:30
अध्याय 32: LGBTQ+ = बीमारी, गुनाह या फैशन?
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अध्याय 33: प्यार करना = बिगड़ जाना?
Duration:00:02:32
अध्याय 31: औरत अगर बाहर काम करे तो घर बर्बाद हो जाता है?
Duration:00:02:16
भाग - 4 : स्वास्थ्य, पैसा और आधुनिक जीवन के भ्रम
Duration:00:00:20
अध्याय 35: Success चाहिए तो नींद भूल जाओ?
Duration:00:02:39
अध्याय 36: मोटापा = सिर्फ खाना?
Duration:00:02:23
अध्याय 37: थेरेपी = पागलों के लिए?
Duration:00:02:46
अध्याय 38: पैसा = खुशी?
Duration:00:02:42
अध्याय 39: Expensive खाना = Healthy खाना?
Duration:00:02:23
अध्याय 40: Supplements = जरूरी चीज़?
Duration:00:02:17
अध्याय 41: Social Media ही असली ज़िंदगी है?
Duration:00:02:40
अध्याय 42: Viral = Valuable?
Duration:00:02:36
भाग - 5 : अंधविश्वास, परंपरा और सामाजिक कुरीतियाँ
Duration:00:00:23
अध्याय 43: जो बुज़ुर्ग कहें, वही अंतिम सत्य है?
Duration:00:02:50
अध्याय 44: जाति व्यवस्था — परंपरा या पक्षपात?
Duration:00:02:35
अध्याय 45: क्या कुंडली मिलाना ज़रूरी है?
Duration:00:02:51
अध्याय 46: बेटा ज़रूरी है — समाज की सबसे जहरीली स्क्रिप्ट
Duration:00:02:40
अध्याय 47: शादी की उम्र तय है? – घड़ी की नहीं, दिमाग की सुनो
Duration:00:02:42
अध्याय 48: दहेज एक रिवाज़ है – ये जुमला नहीं, जहर है
Duration:00:03:13
अध्याय 49: करवा चौथ = प्यार का प्रमाण? – या समाज का एकतरफा इम्तिहान?
Duration:00:02:38
अध्याय 50: लड़की की विदाई = "पराया धन"? – या समाज की सबसे पुरानी धोखाधड़ी?
Duration:00:02:53
अध्याय 51: मासिक धर्म = अशुद्धता? – या सबसे पवित्र झूठ जो समाज ने फैलाया?
Duration:00:02:57
अध्याय 52: काले कपड़े या नींबू-मिर्च = बुरी नज़र से बचाव? – या डर का बिजनेस?
Duration:00:02:58
अध्याय 53: “रीति-रिवाज़ = सच्ची श्रद्धा या दिखावा?” – एक बेनकाब परंपरा
Duration:00:02:55
अध्याय 54: “संस्कार = दबाव या दिशा?” – एक नई व्याख्या
Duration:00:02:51
अध्याय 55: जो सबसे शांत दिखे = वही सबसे अच्छा बच्चा? – एक अधूरी परिभाषा
Duration:00:03:15
अध्याय 56: सच्ची आस्था = बिना सवाल के मानना? – आस्था या अंधश्रद्धा?
Duration:00:03:31
अध्याय 57: सम्मान = उम्र नहीं, सोच से आता है – रिश्तों का नया गणित
Duration:00:03:07
अध्याय 58: किस्मत = सब पहले से तय? – सबसे मीठा धोखा
Duration:00:03:21
अध्याय 59: विधवा = मनहूस? – औरत के जीवन की सबसे ज़हरीली छाया
Duration:00:02:08
अध्याय 60: हथेली की रेखा = भाग्य की लकीर? – मेहनत से बड़ा कोई ग्रह नहीं होता
Duration:00:02:39
अध्याय 61: अंधविश्वास = भक्ति?
Duration:00:02:21
अध्याय 62: हमेशा ऐसा ही होता आया है?
Duration:00:02:28
अंतिम संदेश: अब आप अपनी सच्चाई चुनें
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The End
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