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िकर्त की मस्कराहट, हर्षोल्लास एव उमग में झमते नाचते पश-पर्ियों को देख कर हमारे पविजों ने नत्य को जन्म र्दया होगा। यह वह यग था जब मनष्य कदरत के बीच रहता था। जगल ही उनकी र्जदगी थी। आज हम भले ही उन्हें...