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पहले रेडियो पै रागनी सुणन का बहोत चाव था। पुरे दिन बाट देख्या करते की कब साँझ होगी और कब रागनियां का प्रोग्राम आवेगा। धीरे-धीरे टेम इसा बदल्या की बेरा ए नहीं पाटया। टेम के साथ साथ जिम्मेदारिया का बोझ भी बढ़ता गया और सारे शौक धरे के धरे रहगे। आर इब ना...